द फॉलोअप डेस्क
J&K के पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक (Satyapal Malik) के ठिकानों पर CBI ने छापेमारी की है। मिली खबर के मुताबिक इस मामले में मलिक के ठिकाने सहित 30 अन्य स्थानों पर जांच एजेंसी ने दबिश दी है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मामले के तार किरू हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट अनुबंध से जुड़े हुए हैं। मामला तब का है जब जम्मू और कश्मीर में आर्टिकल 370 लागू था और मलिक वहां के राज्यपाल थे। मलिक पर आरोप है कि किरू हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट अनुबंध की कुछ इकाइयों को मंजूरी देने के लिए उनको 300 करोड़ रुपये की रिश्वत का ऑफर मिला था। हालांकि, इसके बाद मलिक ने इस पर क्या स्टैंड लिया, इसकी जानकारी नहीं दी गयी है, लेकिन सीबीआई को आशंका है कि इतनी बड़ी राशि का ऑफर देने वाले लोगों तक मलिक से पूछताछ के जरिये और उनसे मिले दस्तावेज की जांच से पहुंचा जा सकता है।

क्या है मामला
बता दें कि ये मामला उस समय का भी है जब जम्मू कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश नहीं हुआ था। दूसरे लफ्जों में ये घटना 5 अगस्त 2019 तक यानी आर्टिकल 370 के हटाने से पहले का है। गौरतलब है कि किरू हाइड्रो इलेक्ट्रिक एक प्रोजेक्ट है जिसे साल 2019 में किश्तवाड़ में चिनाब नदी पर प्रस्तावित किया गया था। मिली खबर के मुताबिक इस दौरान 2200 करोड़ रुपये के भवन कार्य का अनुबंध दिया गया था। जांच एजेंसी को आशंका है कि इसके लिए रिश्वत का लेन-देन हुआ।

कौन हैं सत्यपाल मलिक
सत्यपाल मलिक का राजनीतिक सफर 1974 से शुरू हुआ था। उस समय वे यूपी के बागपत से विधायक चुने गये थे। 1980 में लोकदल में आने के बाद उनको पार्टी की ओर से राज्यसभा भेजा गया था। 1980 में उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ा और अलीगढ से सांसद बने। कुछ दिनों बाद उन्होंने मुलायम सिंह कहने पर सपा की सदस्यता ले ली। 1996 में उनको सपा ने लोकसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बनाया लेकिन वे जीत हासिल नहीं कर सके। 2004 में वे बीजेपी में आये। बीजेपी ने भी उनको अलीगढ़ से अपना उम्मीदवार बनाया लेकिन इस बार भी वे हार गये।

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